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​शाह बोले- सहकारी बैंकों को भी दीजिए मौका, मोदी ने कहा- कालेधन को सफेद कराना है क्या ?

India Samvad 22 Nov. 2016 15:22
वोटबैंक को नुकसान पहुंचने की डर से दाहिने हाथ अमित शाह ने सहकारी बैंकों को भी नोटबंदी स्कीम से जोड़ने की मांग उठाई तो मोदी ने उन्हें भी मना कर दिया।

नई दिल्लीः सहकारी बैंकों को भी नोट बदलने का अधिकार देने की मांग उठाने वालों में पीएम मोदी के करीबी नेता भी शामिल हो गए, मगर मोदी टस से मस नहीं हुए। यहां तक कि उनके साथ साये की तरह हमेशा रहने वाले दाहिने हाथ अमित शाह की भी बात मोदी ने नहीं मानी। दरअसल पीएमओ में तैनात मोदी के करीबी अफसरों ने पहले ही आगाह कर दिया था कि देश के सभी राज्यों में सहकारी बैंकों का संचालन वहां के सत्ताधारी दलों के नेता करते हैं। अगर सहकारी बैंकों को भी नोटबंदी स्कीम में शामिल किया गया तो कालाधन पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी का कठोर फैसला बेअसर हो जाएगा। क्योंकि नेता लीगल तरीके से सहकारी बैंकों के जरिए अरबों का कालाधन सफेद करने में सफल हो जाएंगे। अकेले केरल की बैंकों में 52 हजार करोड़ जमा होने की बात कही जा रही।
मोदी के नेल्सन मंडेला बादल हों या मुलायम, सबने मोदी तक लगाया जुगाड़

यूपी की सहकारी बैंकों को भी नोटबंदी में शामिल करने के लिए सत्ताधारी दल सपा के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने सबसे पहले मोदी से संपर्क किया। फिर, महाराष्ट्र के करीबी नेता शरद पवार ने भी मोदी से किसानों का हवाला देकर सहकारी बैंकों को योजना में शामिल करने की गुहार लगाई। इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी मोदी को फोन कर मांग उठा दी। यह वही बादल हैं, जिन्हें कभी मोदी पंजाब के नेल्सन मंडेला की उपाधि से नवाज चुके हैं। मगर मोदी ने सबको दो टूक जवाब दे दिया कि वे सहकारी बैंकों को योजना से जोड़कर कालेधन के खिलाफ मुहिम को कमजोर नहीं करना चाहते।

गुजरात में हंगामा हुआ तो शाह ने भी जोड़ लिया हाथ

खास बात है कि जब गुजरात में भी सहकारी बैंकों को नोट बदलने का अधिकार न देने पर बवाल मचने लगा। हर रोज प्रदर्शन शुरू हुए तो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी चिंतित हो उठे। उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और वित्त सचिव शक्तिकांत दांस के साथ मीटिंग की। कहा जाता है कि शक्तिकांत दास दास सहकारी बैंकों को भी नोट बदलने की छूट देने को राजी नहीं हुए। उन्होंने इसके साइड इफेक्ट भी बताए।फिर भी शाह ने वोटबैंक की चिंता में मोदी से सहकारी बैंकों को भी मौका देने की मांग की। मगर मोदी ने साफ कह दिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वे अपना फैसला नहीं बदलने वाले।

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