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यूरोप में नहीं अपनाई गई ईवीएम तो भारत में क्‍यों?

Updated: May 11, 2017, 10:33 AM IST

इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में छेड़छाड़ का आरोप लगा रहीं राजनीतिक पार्टियों ने सवाल किया है कि यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों ने ईवीएम को क्‍यों नहीं अपनाया है. क्‍यों कुछ देशों ने यह प्रणाली त्‍याग दी है?

इस सवाल के जवाब में चुनाव आयोग ने कहा है कि कुछ देशों ने अतीत में इलेक्‍ट्रॉनिक मतदान का प्रयोग किया है. इन देशों में मशीनों के साथ समस्‍या यह थी कि वे कंप्‍यूटर द्वारा नियंत्रित थीं. वह नेटवर्क से जुड़ी थीं. जिसकी वजह से उनमें हैकिंग किए जाने की आशंका थी.

इसके अलावा उनकी हिफाजत से संबंधित कानूनों एवं रेगुलेशन में पर्याप्‍त उपायों की कमी थी. कुछ देशों में अदालतों ने केवल इन्‍हीं कानूनी आधारों की वजह से ईवीएम के उपयोग को स्‍थगित कर दिया.

जर्मनी, आयरलैंड एवं नीदरलैंड जैसे देशों के विपरीत भारत में ईवीएम की हिफाजत के कड़े इंतजाम हैं.


भारतीय ईवीएम कंप्‍यूटर नियंत्रित नहीं है, वह अपने आपमें स्वतंत्र मशीनें हैं. वह इंटरनेट या किसी अन्य नेटवर्क के साथ किसी भी समय कनेक्‍टेड नहीं हैं. इसलिए उसकी हैकिंग संभव नहीं है.

election_commission_of_indiaचुनाव आयोग

भारत में व्‍यक्तिगत रूप से किसी के लिए भी 1.4 मिलियन मशीनों के साथ छेड़छाड़ करना असंभव है.

भारत ने आंशिक रूप से ही सही, वोट वेरीफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) लागू किया है. दूसरे देशों के पास यह सुविधा नहीं थी.

यूरोप में इसलिए बंद की गई मशीन

अयोग के मुताबिक नीदरलैंड के मामले में, मशीनों के भंडारण, परिवहन एवं सुरक्षा को लेकर नियमों का अभाव था. यहां बनी मशीनों का उपयोग आयरलैंड एवं जर्मनी में भी किया जाता था.

2005 के एक फैसले में जर्मनी के न्‍यायालय ने मतदान उपकरण अध्‍यादेश को असंवैधानिक पाया. इसलिए नीदरलैंड में बनी मशीनों के उपयोग को बंद कर दिया.

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